BCA


  1st year (C Language) 

 

 What is C Language 

C Language एक general-purpose प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जिसको Dennis Ritchie ने 1972 में AT & T’S Bell Telephone Laboratories में बनाया था | Dennis Ritchie एक operating system बनाना चाहते थे जिसका नाम था Unix Operating System, इसको बनाने के लिए ही Dennis Ritchie ने सी लैंग्वेज Developed किया था |

सी लैंग्वेज की मदद से हम low level प्रोग्रामिंग कर सकते है | इसके इस Feature के कारण C programming language का उपयोग System software जैसे – Operating system, Device Driver, Compiler आदि बनाने के लिए किया जाता है |

C Language में बाकि सभी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के बेसिक फीचर्स कवर हो जाते है (जैसे – Variable, Data Types, Array, String, Function, Structure, Pointer, Loop आदि) जिसके कारण C language को बाकि सभी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का Mother Language कहा जाता है |

एक बार सी लैंग्वेज सिखने के बाद आप बाकि सभी Programming Languages को बड़े ही आसानी से सिख सकते है |

 History of C Language 

C Language बनने से पहले सन 1966 में Martin Richard नाम के एक व्यक्ति ने AT & T’S Bell Telephone Laboratories, US मे उस टाइम के सभी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के बेसिक फीचर्स को Combine करके BCPL नाम का एक Programming Language बनाया था जिसका पूरा नाम है – Basic Combine Programming Language |

BCPL बड़ा सॉफ्टवेयर बनाने के लिए उपयुक्त नहीं था साथ ही इसमें Low Level स्टाइल में coding किया जाता था |

Ken Thompson जो की Martin Richard के साथ ही AT & T’S Bell Telephone Laboratories में काम किया करते थे इन्होने 1969 में BCPL लैंग्वेज को सुधार करके B Language बनाई |

दरअसल Ken Thompson एक ऑपरेटिंग सिस्टम बनाना चाहते थे जिसको बनाने के लिए एक अच्छे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की जरुरत थी और वो लैंग्वेज थी B Language | बी लैंग्वेज बनाने के बाद इन्होने Unix Operating System को बनाया |

AT & T’S Bell Telephone Laboratories में ही Dennis Ritchie भी काम किया करते थे जिन्होंने 1972 में C Language को बनाया और Ken Thompson से कहा “अगर हम Unix Operating System को C Language की मदद से बनाये तो इसमें और भी ज्यादा फीचर्स ऐड कर सकते है जिसमे सबसे बड़ा Feature ऑपरेटिंग सिस्टम का पोर्टेबल होना था” |

 Features of C language 

  1. C एक सरल और आसान Programming Language है |
  1. C Language में इंग्लिश जैसे Command/Instructions होते है जिसको पड़ना ,समझना, Code करना एक प्रोग्रामर के लिए बहुत ही आसान है |
  1. C एक Procedure Oriented प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है |
  1. C बहुत ही पॉवरफुल और Case Sensitive प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है |
  1. C Language Compiler based ,डायनामिक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है |
  1. C Language एक Middle level language है जिसके कारण इससे Low Level और High Level दोनों ही तरह की प्रोग्रामिंग की जा सकती है |
  1. सी लैंग्वेज ऑपरेटिंग सिस्टम और एम्बेडेड सिस्टम डेवलपमेंट करने में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है।
  1. सी लैंग्वेज काफी पोर्टेबल और पॉवरफुल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है | 
  1. सी लैंग्वेज एक Syntax Based Language है | 
  1. सी एक जनरल पर्पस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जो बाकि सभी लैंग्वेज के बेसिक फीचर्स को कवर कर लेता है |

C Language मे Token क्या होते है, और कितने प्रकार के होते है।

टोकन किसी भी प्रोग्राम की सबसे छोटी या आधारभूत इकाई है। एक या अधिक अक्षरों को एक क्रम में जोड़कर बनाए गए अर्थपूर्ण शब्द टोकन (Token) कहलाते हैं। 
सी भाषा में टोकन को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया किया गया है -
  1. Keyword
  2. Identifiers
  3. Constants
  4. Operator
  5. Special Symbol
1) कीवर्ड्स (Keyword)

सी भाषा में प्रयोग किए जाने वाले ऐसे शब्द जिनका अर्थ पहले से ही परिभाषित होता है Keywords कहलाते हैं। इनका प्रयोग Variable के नाम, Function के नाम आदि के लिए नहीं किया जा सकता है। चूंकि यह विशेष कार्य के लिए प्रयोग किए जाते हैं इसलिए इन्हें Reserve Word भी कहते हैं। 
नोट - सभी कीवर्ड्स छोटे अक्षरों में ही होने चाहिए इनमे बड़े अक्षरों में प्रयोग नहीं किया जाता। यदि बड़े अक्षरों का प्रयोग करेंगे तो उन्हें Identifier समझा जाएगा तथा Keyword का अर्थ User द्वारा बदला नहीं जा सकता। नीचे दी गई सारणी में विभिन्न कीवर्ड्स को दर्शाया गया है।

autodoubleintstruct
breakelselongswitch
caseenumregistertypedef
charextemreturnunion
constfloatshortunsigned
continueforsignedvoid
defaultgotosizeofvolatile
doifstaticwhile

(2) आईडेंटिफायर (Identifiers)

Identifiers ऐसा शब्द होता है, जिसमें एक या अधिक अक्षर या संख्या एक क्रम मे होते हैं, तथा इसमें एक विशेष अक्षर "_" (Underscore) भी हो सकता है। सामान्यतः तक एक Identifiers किसी अक्षर या अंडरस्कोर से प्रारंभ होता है, जिसके बाद में कोई संख्या, अक्षर, अंक या अंडरस्कोर हो सकते हैं।

Identifier बनाने के नियम 

  1. आईडेंटिफायर बनाने हेतु कुछ मूल नियम निम्न प्रकार है 
  2. आईडेंटिफायर में पहला वर्ण एक अक्षर या अंडर स्कोर होना चाहिए तथा इसके बाद कोई संख्या, अक्षर, अंक या अंडरस्कोर हो सकते हैं ।
  3. इसमें अक्षर संख्या या अंडरस्कोर के अलावा कोई अतिरिक्त चिन्ह नहीं हो सकता। 
  4. Identifiers की अधिकतम लंबाई 31 वर्णो तक की हो सकती है।
(3) कांस्टेंट्स (Constants)

Constants एक डाटा आइटम है जो एक प्रोग्राम के Execution के दौरान नहीं बदलता है। सी भाषा में कांस्टेंट्स को दो मुख्य भागों में वर्गीकृत किया गया है-
  1. संख्यात्मक (Numeric)
  2. असंख्यात्मक (Non-numeric)
(i) संख्यात्मक (Numeric) - संख्यात्मक कांस्टेंट्स दो प्रकार के होते हैं। 
  • Integer
  • Floating Point

(a) Integer Constants
Integer Constants एक संपूर्ण संख्या है जिसमें कोई भी दशमलव नहीं होता, इसमें +  तथा - चिन्ह को छोड़कर किसी अन्य Character का प्रयोग नहीं हो सकता है, यदि + तथा - का प्रयोग करना है तो उन्हें संख्याओं के आगे होना चाहिए ।
(b) Floating Point Constants
ऐसी न्यूमैरिक मात्राएं जिन्हें भिन्नातमक (Fractional) रूप में व्यक्त किया जाए Floating Point Constants कहलाती है। सभी ऋणात्मक संख्याओं के  पहले ‘-‘ का चिन्ह तथा सभी धनात्मक संख्याओं से पहले ‘+’ का चिन्ह होना चाहिए जो कि जरूरी नहीं है । इसके अतिरिक्त कोई अन्य अक्षर नहीं हो सकता। 

(ii) असंख्यात्मक (Non-numeric)- असंख्यात्मक कांस्टेंट्स  भी दो प्रकार के होते हैं ।
  • Character Constants
  • String Constants
(a) Character Constants
Bracket के अंदर का Character, Character Constants कहलाता है। इसके प्रत्येक अक्षर के साथ एक अनोखा नाम जुड़ा होता है जैसे ASCII अर्थात American Standard Code for Information Interchange कहते हैं। इसके अलावा Backslash Constants भी होता है, जो करैक्टर कांस्टेंट के अंतर्गत आता है, Backslash Constants, Backslash से शुरू होता है तथा इसके बाद एक Character आता है, तथा कुछ करैक्टर के साथ लगकर बैकस्लैश उन करैक्टरो के अर्थ को बदलकर विशेष प्रिंटिंग प्रभाव उत्पन्न करता है ।
(b) String Constants
Character का वह क्रम जिसे Double cot (“ ”) के अंदर लिखा गया हो String Constants कहलाता है। String हमेशा Null (जिसे \0 से प्रदर्शित किया जाता है)  Character से समाप्त होती है।

4) ऑपरेटर (Operator)

Operator एक संकेत टोकन है जिसका प्रयोग किए जाने वाले कार्य को निर्धारित करने में किया जाता है। सी भाषा में कई प्रकार के ऑपरेटर होते है-
  1. Arithmetic Operator
  2. Assignment Operator
  3. Increment/Decrement Operator
  4. Relational Operator
  5. Logical Operator
  6. Conditional Operator
  7. Bitwise Operator
  8. Special Operator 





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